शिक्षा में सुधार की दरकार

शिक्षा ही हमारे लिए सुनहरे भविष्य के द्वार खोलती है। शिक्षा से ही इंसान समाज सुधार के काम करने के साथ-साथ दूसरे लोगों का भी भला कर पाता है। बिना शिक्षा के इंसान को पशु करार दिया गया है। हमने देखा है कि जब कई अविष्कारों से जुड़ी खबरें अखबारों में आती है तो पता चलता है कि जिसने वह अविष्कार किया था उसने कुछ ना कुछ पढ़ाई अवश्य की होती है। इस बात से समझा जा सकता है कि शिक्षा की एक जोत हमारे जीवन भर के उजाले का कार्य करती है, लेकिन मौजूदा हालात पर गौर करें तो कई चैंकाने वाले तथ्य सामने आते हैं। प्रदेश के कई स्कूल ऐसे हैं जहां शिक्षा में सुधार के व्यापक इंतजाम करने की जरूरत है। सरकार को अपने कामकाज का रिपोर्ट कार्ड देने का पूरा अधिकार है, लेकिन शिक्षा का रिपोर्ट कार्ड भी तो कभी दीजिए हुजूर। हम सरकार से पूछते हैं कि सरकारी स्कूलों में कितने बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ? किस तरह के पाठ्यक्रम शामिल किए हैं, जो मौजूदा दौर के हिसाब से उपयुक्त है? पहले के मुकाबले अब कौन से कदम उठाए गए हैं जिससे शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं? बच्चों का भविष्य बेहतर बनाने वाले टीचरों के लिए सरकार ने क्या इंतजामात किए हैं, ताकि उनके कौशल का और विकास हो सके। वह प्रदेश स्तर पर कौन सी प्रतियोगिताएं हैं जिससे छात्रों का शारीरिक और मानसिक विकास करने में सरकार को बड़ी उपलब्धि मिली हो? सवालों की सूची काफी लंबी है, लेकिन समाधान एक। सरकार को चाहिए कि वह शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए उठाए गए अपने कदमों की समीक्षा करें।


- धनसिंह भंडारी, चमोली
- साभार जागरण

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