शिक्षा में सुधार की दरकार

हम लोगों की पूरी उम्र का दारोमदार अपने शुरुआती जीवन में मिली शिक्षा पर निर्भर होता है। शिक्षा ही हमारे लिए सुनहरे भविष्य के द्वार खोलती है। शिक्षा से ही इंसान समाज सुधार के काम करने के साथ-साथ दूसरे लोगों का भी भला कर पाता है। बिना शिक्षा के इंसान को पशु करार दिया गया है। हमने देखा है कि जब कई अविष्कारों से जुड़ी खबरें अखबारों में आती है तो पता चलता है कि जिसने वह अविष्कार किया था उसने कुछ ना कुछ पढ़ाई अवश्य की होती है। यह उसकी थोड़ी बहुत पढ़ाई का नतीजा होता है कि जिसके जरिए वह बड़े अविष्कार कर पाता है इस बात से समझा जा सकता है कि शिक्षा की एक जीत हमारे जीवन भर के उजाले का कार्य करती है, लेकिन मौजूदा हालात पर गौर करें तो कई चैंकाने वाले तथ्य सामने आते है। प्ररदेश के कई स्कूल ऐसे है जहां शिक्षा में सुधार के व्यापक इंतजाम करने की जरूरत है। सरकार को अपने कामकाज का रिपोर्ट कार्ड देने का पूरा अधिकार है, लेकिन शिक्षा का रिपोर्ट कार्ड देने का पूरा अधिकार है, लेकिन शिक्षा का रिपोर्ट कार्ड भी तो कभी दीजिए हुजूर। हम सरकार से पूछते है उन्होंने बीते तीन सालों में शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए क्या कारगर उपाय किए। सरकारी स्कूलों में कितनें बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ? किस तरह के पाठ्यक्रम शामिल किए है, जौ मौजूदा दौर के हिसाब से उपयुक्त है? पहले के मुकाबले अब कौन से कदम उठाए गए है जिससे शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव आए है? बच्चों का भविष्य बेहतर बनाने वाले टीचरों के कौशल का और विकास हो सके। वह प्रदेश स्तर पर कौन सी प्रतियोगिताएं है जिससे छात्रों को शारीरिक और मानसिक विकास करने में सरकार को बड़ी उपलब्धि मिली हो? सवालों की सूची काफी लंबी है। सरकार को चाहिए कि वह शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए उठाए गए अपने कदमों की समीक्षा करें और पूरे फोकस के साथ अपने राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाएं, ताकि प्रदेश के युवाओं को नौकरी की तलाश में न भटकना पड़े।


- धनसिंह भंडारी, देवाल
- साभार जागरण

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