समान शिक्षा और रोजगार

विगत पांच वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वंचित वर्गों की अस्मिता की जो राजनीति शुरू की, उसके अंतर्गत उज्ज्वला, हर घर को बिजली, आयुष्मान जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं का सूत्रपात करके सराहनीय कार्य किया, परंतु समान शिक्षा और सबको रोजगार जैसे आधारभूत मुद्दों को उन्होंने नजरंदाज कर दिया, जो किसी भी राष्ट्र के समग्र विकास की धुरी हैं। इनमें राष्ट्रीय अस्मिता, सांस्कृतिक अस्मिता, अगड़े-पिछड़े- सभी वर्गों की अस्मिता समाहित है, साथ ही इनका सीधा संबंध नौजवानों से है, जिनके कंधों पर राष्ट्र का भविष्य निर्भर है। यदि सबको समान शिक्षा और रोजगार मिल जाए, तो सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक तौर पर हाशिये पर खड़े नौजवानों को लगेगा कि उनके जीवन में भी सुधार संभव है, और तब वह राष्ट्र के लिए अपना अपेक्षित योगदान भी कर सकेगा। सच यही है कि देश का निरीह, वंचित युवा वर्ग आज भी अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए संघर्ष करता दिखता है।


सत्य प्रकाश, लखीमपुर
साभार हिन्दुस्तान

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