हड़ताल से बेहाल छात्र

देश की नींव रखने में शिक्षक बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। लेकिन क्या होगा, जब देश की नींव रखने वाले शिक्षक ही हड़ताल पर बैठ जाएं? नए साल का पहला महीना आधा खत्म हो चुका है और जल्द ही यह महीना पूरा भी हो जाएगा। लेकिन साल की शुरुआत में दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षकों की शुरू हड़ताल के कारण विद्यार्थियों को उनकी पढ़ाई का नुकसान उठाना पड़ रहा है। दिल्ली विश्वविद्यालय में दूर-दूर से छात्र पढ़ने आते हैं। जाहिर है, दूर-दूर से लंबा रास्ता तय करके जब वह कॉलेज पहुंचते हैं, तब उन्हें हड़ताल के कारण उलटे पैर वापस अपने घर लौटना पड़ता है। शिक्षकों की यह हड़ताल अब विद्यार्थियों के लिए सिरदर्द बनती जा रही है। सरकार को जल्द ही इस हड़ताल का स्थाई समाधान खोजना चाहिए और शिक्षकों को भी परेशानियों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भान होना चाहिए। ऐसा किया जाना बहुत जरूरी है, क्योंकि यह देश के भविष्य से जुड़ा मसला है।


निशांत रावत, दिल्ली विश्वविद्यालय.


साभार हिन्दुस्तान

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