कहावत है कि एक सड़ी हुई मछली सारे तालाब को गंदा कर देती है। यह कहावत शिक्षा जगत पर बिल्कुल फिट बैठती है। इक्का-दुक्का सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ होता है या शिक्षक लापरवाही बरतते हैं, मगर खामियाजा पूरे सरकारी तंत्र की शिक्षा-व्यवस्था को भुगतना पड़ता है। दिल्ली में ही सरकारी स्कूलों में करोड़ों की लागत से सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना अमल में लाई जा रही है। मगर क्या वाकई इसकी जरूरत है? मेरा मानना है कि स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे से ज्यादा जरूरत कंप्यूटरीकृत शिक्षा को बढ़ावा देने की है। स्कूलों में घटित होने वाली घटनाओं को रोक पाना काफी हद तक स्कूल प्रशासन द्वारा संभव है, इसलिए बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी के लिए ज्यादा से ज्यादा संसाधन अध्यापकों के अनुरूप होने चाहिए। वैसे भी जब हम अपने बच्चों को शिक्षकों की योग्यता पर भरोसा करके तालीम दिलाने के लिए स्कूल भेजते हैं, तो फिर सुरक्षा के संबंध में उन पर अविश्वास क्यों?.
पिंटू सक्सेना, लखनऊ
साभार हिन्दुस्तान
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