शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत

वर्तमान समय में युवाओं के लिए किसी भी क्षेत्र में नौकरी पाना बहुत ही कठिन हो गया है। लगातार बढ़ रही प्रतियोगिताओं के कारण कई होनहार एक छोटी सी गलती के कारण पीछे रह जाते हैं और जीवन भर संघर्ष ही करते नजर आते हैं। कई युवाओं को तो पता ही नहीं होता कि उनका उद्देश्य क्या है। वह तो भेड़ चाल चलते हुए पढ़ते रहते हैं और फिर कॅरियर चुनने के समय असमंजस की स्थिति में पहुंच जाते हैं। आज स्थिति यह हो गई है कि युवा पढ़ाई किसी अन्य विषय की करते हैं और नौकरी के लिए किसी अन्य फील्ड में ही तैयारी करते रहते हैं। जिससे कई बार युवाओं को निराशा ही हाथ लगती है और इसके चलते कई युवा जीवन से हारकर आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते हैं। सभी क्षेत्रों में एक साथ प्रयास करने के कारण ही प्रतियोगिता भी बढ़ रही है। जब इन प्रतियोगिताओं में कोई प्रतिभागी किसी कारण वश बाहर हो जाता है तो वह काफी निराश भी हो जाता है। इससे आत्म विश्वास कम होने के कारण वह उस क्षेत्र में भी अच्छा नहीं कर पाता, जिसमें वह बेहतर है। इसकी गहराई में जाएं तो पता चलता है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था में ही कमी होने के कारण यह समस्याएं आती हैं। पुरानी शिक्षा प्रणाली आज के परिवेश में कारगर साबित नहीं हो पा रही है। इसमें बदलाव की जरूरत है। छात्रों को छोटी कक्षाओं से ही उनके कॅरियर के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता है। साथ ही उन्हें अपने पसंदीदा क्षेत्र में ही मन लगाकर तैयारी करने के लिए प्रेरित करने की जरूरत है। यदि ऐसा होता है तो प्रत्येक क्षेत्र में ऐसे लोग मिल सकेंगे जो अपने कार्य में बेहतर होंगे। इससे विकास की गति भी तेज होगी और सभी को रोजगार भी मिल सकेगा। इसके विपरीत यदि इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो यह समस्या यूं ही बनी रहेगी।


कपिल तिवारी, देहरादून


साभार जागरण

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