विकसित देशों की तर्ज पर भारत के स्कूलों में भी शतरंज अनिवार्य होना चाहिए

हल्द्वानी।

विकसित देशों ने अपने स्कूलों में बच्चों के लिए शतरंज अनिवार्य किया है। शतरंज खेलने से न केवल बच्चों में एकाग्रता आती है, बल्कि किसी भी परिस्थिति का डटकर सामना करने की क्षमता का विकास होता है। यह बात अर्जुन अवार्ड विजेता ग्रैंड मास्टर प्रवीण थिप्से ने कही।

हल्द्वानी-नैनीताल हाईवे स्थित एक रेस्टोरेंट में रविवार को पत्रकारों से अपने अनुभव साझा करते हुए प्रवीण थिप्से ने कहा कि स्कूलों में शतरंज को खेल के तौर पर अनिवार्य किया जाना चाहिए। शतरंज खेलने से सोचने की क्षमता में बढ़ोतरी होती है। इससे आइक्यू बढ़ने के साथ ईक्यू भी बढ़ता है। कहा कि शतरंज ही एक ऐसा खेल है जिसमें हार या जीत के बाद खिलाड़ी किसी तरह उग्र स्वभाव नहीं दिखाता है। इसी तरह बच्चों को यदि शतरंज सिखाया जाए तो उनके उग्र स्वभाव पर भी काबू पाया जा सकता है।

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