प्राइमरी शिक्षा पलायन की मुख्य वजह, आंकड़ों ने खोली पोल

देहरादून।

पहाड़ों में स्थित आधे से ज्यादा प्राथमिक विधालय बंद होने के कगार पर है। प्राथमिक विधालयों के ये हालात है कि अभिभावक अपने बच्चों को वहां भेजने से कतरा रहें हैं। यहीं कारण है कि आज पहाड़ों में पलायन तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पलायन का एक मुख्य कारण प्राथमिक शिक्षा भी है। पहाडों में प्राथमिक शिक्षा का ये हाल है कि जिस स्थान पर विधालय है वहां बच्चे नहीं है और जहां बच्चे है वहां विधालय ही नही हैं, इसके अलावा कई विधालयों में बच्चे तो है लेकिन शिक्षकों की कमी है। ऐसे में पहाड़ों स्थित प्राथमिक विधालयों में तमाम खामियां देखने को मिल रही है।

आंकड़ों के अनुसार 2521 प्राथमिक विद्यालय सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। ऐसे में 10 से कम छात्रसंख्या वाले विद्यालयों का आंकड़ा 2847 हो गया है। ये विद्यालय कुल विद्यालयों की संख्या का तकरीबन एक चैथाई हैं। सिर्फ एक या दो छात्रसंख्या वाले विद्यालयों की संख्या 264 और शून्य छात्रसंख्या वाले 71 विद्यालय हैं। प्रदेश में 2846 प्राथमिक शिक्षकों की कमी बनी हुई है। शिक्षा के नाम पर की जा रही खानापूरी से खफा अभिभावक अपने पाल्यों को सरकारी विद्यालयों में ही भेजने से कतराने लगे हैं। अलग राज्य बने हुए 18 साल के बाद भी प्राथमिक शिक्षा के जो हालात हैं, दूरदराज पर्वतीय क्षेत्रों की बदनसीबी की दास्तां बयां करने को काफी हैं। इन क्षेत्रों में एक भी शिक्षक नहीं, ऐसे 178 प्राथमिक विद्यालय हैं।

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