नई शिाक्षा नीति असल इतिहास से रूबरू कराएगी

नई शिाक्षा नीति असल इतिहास से रूबरू कराएगी

पारंपरिक भारतीय शिक्षा प्रणाली का महत्व और भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्य से देवभूमि उत्तराखण्ड यूनिवर्सिटी में मंगलवार को सम्मेलन हुआ। मुख्य अतिथि भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय सह-संगठन मंत्री शंकरानंद वीआर ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय शिक्षण प्रणाली में मील का पत्थर साबित होगी। नई शिक्षा नीति से नई पीढ़ी भारत के वास्तविक इतिहास और महान संस्कृति से रूबरू हो सकेगी।
मांडूवाला स्थित  यूनिवर्सिटी परिसर में आधुनिक शिक्षा पद्धति में प्राचीन शिक्षा पद्धति के सम्मिश्रण पर चर्चा हुई। इसे आने वाली पीढ़ी के लिए उपयोगी बताया गया। पूर्व डीजीपी अनिल रतूड़ी ने कहा कि सभ्यता चाहे जितनी बड़ी हो, संस्कृति की रक्षा के बिना वो मिट जाती है। इसलिए हमें अपनी पुरातन संस्कृति को भारतीय ज्ञान परंपरा से आगे बढ़ाना होगा। हेस्को के संस्थापक पदमभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि दुनिया पर हमारी पकड़ तभी बनेगी जब हमारी शिक्षा प्रणाली मजबूत होगी। प्राचीन और आधुनिक शिक्षा प्रणाली के सम्मिश्रण से बनी नई नीति का अनुसरण बहुत अच्छा प्रयास है। भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ स्कूल एजुकेशन एंड लिटरेसी के निदेशक  डॉ. जेपी पांडे ऑनलाइन इस सम्मेलन से जुड़े। उन्होंने कहा कि शोध भारतीय ज्ञान परंपरा के अनुसार होने चाहिए। कुलपति प्रो. प्रीति कोठियाल ने कहा कि इस सम्मेलन का  उद्देश्य प्रतिभागियों को भरतीय ज्ञान प्रणाली को संरक्षित और प्रसारित करने में सक्षम बनाना है। इस दौरान उपकुलाधिपति अमन बंसल, उपकुलपति प्रो. अरके त्रिपाठी, चीफ ऑडिटर डॉ संदीप विजय, मुख्य सलाहकार डॉ. एके जायसवाल, डीन एकेडेमिक्स डॉ. एकता उपाध्याय मौजूद रहे।

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