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Nobel Laureates

Nobel Laureates

Amartya Sen (b-1933): Prof. Amartya Sen is the recipient of the Nobel Prize for Economics for the year 1998, becoming the first Asian to have been honoured with the award. The Santiniketanborn economist who is a pioneer in Welfare Economics has to his credit several books and papers on aspects of welfare and development. An economist with a difference, Prof. Sen is a humanist. He has distinguished himself with his outstanding writings on famine, poverty, democracy, gender and social issues. The 'impossibility theorem' suggested earlier by Kenneth Arrow states that it was not possible to aggregate individual choices into a satisfactory choice for society as a whole. Prof. Sen showed mathematically that societies could find ways to alleviate such a poor outcome. अमर्त्य सेन (जन्मः 1933): अर्थशास्त्र के लिए 1998 का नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रोफेसर अमर्त्य सेन पहले एशियाई हैं। शांतिनिकेतन में जन्मे इस विद्वान अर्थशास्त्री ने लोक कल्याणकारी अर्थशास्त्र की अवधारणा का प्रतिपादन किया है। उन्होंने कल्याण और विकास के विभिन्न पक्षों पर अनेक पुस्तकें तथा पर्चे लिखे हैं। प्रोफेसर सेन आम अर्थशास्त्रियों के समान नहीं हैं। वह अर्थशास्त्री होने के साथ-साथ, एक मानववादी भी हैं। उन्होंने, अकाल, गरीबी, लोकतंत्र, स्त्री-पुरुष असमानता और सामाजिक मुद्दों पर जो पुस्तकें लिखी हैं, वे अपने-आप में बेजोड़ हैं। केनेथ ऐरो नाम के एक अर्थशास्त्री ने असंभाव्यता सिद्धांत नाम की अपनी खोज में कहा था कि व्यक्तियों की अलग-अलग पसंद को मिलाकर समूचे समाज के लिए किसी एक संतोषजनक पसंद का निर्धारण करना संभव नहीं है। प्रोफेसर सेन ने गणितीय आधार पर यह सिद्ध किया है कि समजा इस तरह के नतीजों के असर को करने के उपाय ढूंढ सकता है। Subramanian Chandrashekhar (1910-1995): The Nobel Prize for Physics in 1983 was awarded to Dr S. Chandrashekhar, an Indian-born astrophysicist. Educated in Presidency College, Chennai, Dr Chandrashekhar happened to be the nephew of his Nobel forbear, Sir C.V. Raman. He later migrated to the United States where he authored several books on Astrophysics and Stellar Dynamics. He developed a theory on white dwarf stars which posts a limit of mass of dwarf stars known also as Chandrashekhar Limit. His theory explains the final stages of stellar evolution. सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर(1910-1995): सन 1983 में भौतिक शास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर खगोल भौतिक शास्त्री थे। उनकी शिक्षा चेन्नई के प्रेसीडेंसी कॉलेज में हुई। वह नोबेल पुरस्कार विजेतर सर सी.वी. रमन के भतीजे थे। बाद में चंद्रशेखर अमेरिका चले गए, जहां उन्होंने खगोल भौतिक शास्त्र तथा सौरमंडल से संबंधित विषयों पर अनेक पुस्तकें लिखीं। उन्होंने ‘व्हाइट ड्वार्फ’ यानी श्वेत बौने नाम के नक्षत्रों के बारे में सिद्धांत का प्रतिपादन किया। इन नक्षत्रों के लिए उन्होंने जो सीमा निर्धारित की है, उसे चंद्रशेखर सीमा कहा जाता है। उनके सिद्धांत से ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बारे में अनेक रहस्यों का पता चला। Mother Teresa (1910-1997): The Nobel Peace Prize was awarded to Mother Teresa in 1979. Albanian parentage, Agnes Gonxha Bojaxhiu was born at Skopje, now in Yogoslavia. She joined the Irish order of the Sisters of Loretto at Dublin in 1928 and came to Kolkata in 1929 as a missionary, only to find the misery of the abandoned and the destitute. Concern for the poor and the sick prompted her to found a new congregation, Missionaries of Charity. Having become an Indian citizen, Mother Teresa served the cause of dying destitutes, lepers and drug addicts, through Nirmal Hriday (meaning Pure Heart), the main centre of her activity. Her selfless service and unique devotion, not only to helpless fellow-Indians but also to the cause of world peace, earned her and India the first Nobel Peace Prize. मदर टेरेसा (1910-1997): मदर टेरेसा को 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला। मदर का जन्म अल्बानिया में स्कोपजे नामक स्थान पर हुआ था, जो अब यूगोस्लाविया में है। उनका बचपन का नाम एग्नस गोंक्सहा बोजाक्सिऊ था। सन 1928 में वह आयरलैंड की संस्था सिस्टर्स आफ लोरेटो में शामिल हुईं और मिशनरी बनकर 1929 में कोलकाता आ गईं। उन्होंने बेसहारा और बेघरबार लोगों के दुख दूर करने का महान व्रत लिया। निर्धनों और बीमार लोगों की सेवा के लिए उन्होंने मिशनरीज ऑफ चैरिटी नाम की संस्था बनाई और कुष्ठ रोगियों, नशीले पदार्थों की लत के शिकार बने लोगों तथा दीन-दुखियों के लिए निर्मल हृदय नाम की संस्था बनाई। यह संस्था उनकी गतिविधियों का केंद्र बनी। उन्होंने पूरी निष्ठा से न सिर्फ बेसहारा लोगों की निःस्वार्थ सेवा की, बल्कि विश्व शांति के लिए भी प्रयास जारी रखे। उन्हीं की बदौलत भारत शांति के लिए अपने एक नागरिक द्वारा नोबेल प्राप्त करने का गौरव प्राप्त कर सका है। Hargobind Khorana (1922-2011): Hargobind Khorana was awarded the Nobel Prize for Medicine in 1968. Of Indian origin, Dr Khorana was born in Raipur, Punjab (now in Pakistan). He took his doctoral degree in Chemistry from Liverpool University and joined the University of Wisconsin as a Faculty Member in 1960. His major breakthrough in the field of Medicine -interpreting the genetic code and analysing its function in protein synthesis- fetched him the Nobel Prize. हरगोबिंद खुराना (1922-2011): हरगोबिंद खुराना को चिकित्सा के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया। भारतीय मूल के डॉ. खुराना का जन्म पंजाब में रायपुर (जो अब पाकिस्तान में है) में हुआ था। उन्होंने लिवरपूल विश्वविद्यालय से रसायन शास्त्र में डाक्टरेट की डिग्री ली। सन 1960 में वह विस्कौसिन विश्वविद्यालय में प्राध्यापक बने। उन्होंने अपनी खोज से आनुवांशिक कोड की व्याख्या की और प्रोटीन संश्लेषण में इसकी भूमिका का पता लगाया। Chandrashekhar Venkataraman (1888-1970): India's first Nobel Prize for Physics was claimed in 1930 by the renowned physicist Sir C.V. Raman. Born at Thiruvanaikkaval near Tiruchirapalli in Tamilnadu, Raman studied at Presidency College, Chennai. Later, he served as Professor of Physics at Calcutta University. Recipient of many honours and awards, including the title of 'Sir', Sir C.V. Raman received the Nobel Prize for an important optics research, in which he discovered that diffused light contained rays of other wavelengths-what is now popularly known as Raman Effect. His theory discovered in 1928 explains the change in the frequency of light passing through a transparent medium. चंद्रशेखर वेंकटरमन (1888-1970): भौतिक शास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले भारतीय डॉ. चंद्रशेखर वेंकटरमन थे। उन्हें 1930 में यह पुरस्कार प्राप्त हुआ। रमन का जन्म तमिलनाडु में तिरुचिरापल्ली के पास तिरुवाइक्कावल में हुआ था। उन्होंने चेन्नई के प्रेसीडेंसी कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की। बाद में वह कोलकाता विश्वविद्यालय में भौतिक शास्त्र के प्रोफेसर बने। चंद्रशेखर वेंकटरमन ने अनेक पुरस्कार और सम्मान प्राप्त किए। उन्हें ‘सर’ की उपाधि से भी सम्मानित किया गया और प्रकाशकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अनुसंधान के लिए नोबेल पुरस्कार मिला। उन्होंने अपने अनुसंधान में इस बात का पता लगाया कि किस तरह अपसरित प्रकाश में अन्य तरंग, लंबाई की किरणें भी मौजूद रहती हैं। उनकी खोज को रमन प्रभाव के नाम से भी जाना जाता है। सन 1928 में की गई इस खोज से पारदर्शी माध्यम से होकर गुजरने वाली प्रकाश किरणों में आवृत्ति परिवर्तन की व्याख्या की गई है। Rabindranath Tagore (1861-1941): Rabindranath Tagore was the first Indian ever to receive a Nobel Prize. Popularly known as Gurudev, India's Poet Laureate Tagore was born on 7th May 1861, in Kolkata. He was awarded the Nobel Prize for Literature in recognition of his work Geetanjali, a collection of poems, in 1913. Tagore wrote many love lyrics. Geetanjali and Sadhana are among his important works. The poet, dramatist and novelist is also the author of India's National Anthem. In 1901 he founded the famous Santiniketan which later came to be known as Vishwabharati University. रवींद्रनाथ ठाकुर (1861-1943): रवींद्रनाथ ठाकुर, साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय थे। ‘गुरुदेव’ के नाम से प्रसिद्ध रवींद्रनाथ ठाकुर का जन्म 7 मई, 1861 को कोलकाता में हुआ। उन्हें उनकी कविताओं की पुस्तक गीतांजलि के लिए 1913 का साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिया गया। रवींद्रनाथ ठाकुर ने अनेक प्रेमगीत भी लिखे हैं। गीतांजलि और साधना उनकी महत्वपूर्ण कृतियां हैं। महान कवि, नाटककार और उपन्यासकार के रूप में प्रसिद्ध ‘गुरुदेव’ ने भारत के राष्ट्र गान का भी प्रणयन किया। सन 1901 में उन्होंने शांतिनिकेतन की स्थापना की, जो बाद में विश्वभारती विश्वविद्यालय के नाम से प्रसिद्ध हुआ। Kailash Satyarthi (born 'Kailash Sharma'; 11 January 1954) is an Indian children's rights and education advocate and an activist against child labour.] He founded the Bachpan Bachao Andolan (lit. Save the Childhood Movement) in 1980 and has acted to protect the rights of more than 83,000 children from 144 countries. It is largely because of Satyarthi's work and activism that the International Labour Organization adopted Convention No. 182 on the worst forms of child labour, which is now a principal guideline for governments around the world His work is recognized through various national and international honours and awards including the Nobel Peace Prize of 2014, which he shared with Malala Yousafzai of Pakistan. कैलाश सत्यार्थी (जन्म: 11 जनवरी 1954) एक भारतीय बाल अधिकार कार्यकर्ता और बाल-श्रम के विरुद्ध पक्षधर हैं। उन्होंने १९८० में बचपन बचाओ आन्दोलन की स्थापना की जिसके बाद से वे विश्व भर के १४४ देशों के ८३,००० से अधिक बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए कार्य कर चुके हैं। सत्यार्थी के कार्यों के कारण ही वर्ष १९९९ में अंतरराष्ट्रीय श्रम संघ द्वारा बाल श्रम की निकृष्टतम श्रेणियों पर संधि सं॰ १८२ को अंगीकृत किया गया, जो अब दुनियाभर की सरकारों के लिए इस क्षेत्र में एक प्रमुख मार्गनिर्देशक है। उनके कार्यों को विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों व पुरुस्कारों द्वारा सम्मानित किया गया है। इन पुरुस्कारों में वर्ष २०१४ का नोबेल शान्ति पुरस्कार भी शामिल है जो उन्हें पाकिस्तान की नारी शिक्षा कार्यकर्ता मलाला युसुफ़ज़ई के साथ सम्मिलित रूप से प्रदान किया गया है

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