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व्यावहारिक बनाई जाए शिक्षा

हिंदी के मूर्धन्य साहित्यकार जयशंकर प्रसाद ने अपने महाकाव्य ‘कामायनी’ में लिखा है, ‘ज्ञान दूर कुछ क्रिया भिन्न है, इच्छा क्यों पूरी हो मन की, एक दूसरे से न मिल सके, यह विडंबना है जीवन की।’ यहां ज्ञान का अर्थ है पुस्तकीय शिक्षा, ज्ञान और क्रिय…