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शब्दों के खेल में भाषा का नया संसार रचते बच्चे

स्कूल का समय हो गया था। आठवीं के बच्चे तेजी से भागते हुए कक्षा में आ रहे थे। दूर पहाडियों से ठंडी-ठंडी हवा धान के खेत से होते हुए बच्चों के साथ-साथ कमरे में आ पहुंची थी। खिड़की के बाहर पोखर का पानी क्षिलमिला रहा था। इस बुनियादी विधालय में अधिकांश लड़क…